ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते ॥
"हे देवी! आप जयन्ती (सदा विजयशालिनी) हैं, आप मङ्गला (मंगलमयी) हैं, आप काली (काल का नाश करने वाली) हैं, आप भद्रकाली (भक्तों का कल्याण करने वाली) हैं, आप कपालिनी (विकराल स्वरूप) हैं, आप दुर्गा (दुर्गति का नाश करने वाली) हैं, आप क्षमा (क्षमादायिनी) हैं, आप शिवा (कल्याणकारिणी) हैं, आप धात्री (समस्त जगत को धारण करने वाली) हैं, आप स्वाहा (यज्ञ की आहुति स्वीकार करने वाली) हैं, और आप स्वधा (पितरों को तृप्ति देने वाली) हैं।
आपको बारम्बार नमस्कार है।"
We offer our salutations to Thee, O Goddess:
जयन्ती (Jayantī) : The Victorious
मङ्गला (Maṅgalā) : The Auspicious
काली (Kālī) : The Power of Time
भद्रकाली (Bhadrakālī) : The Benevolent Destroyer
कपालिनी (Kapālinī) : The Wielder of the Skull
दुर्गा (Durgā) : The Deliverer from Distress
क्षमा (Kṣamā) : The Forgiving
शिवा (Śivā) : The Blissful
धात्री (Dhātrī): The Supporter of Cosmos
स्वाहा(Svāhā) & स्वधा (Svadhā): The Receiver of Offerings