अहं ब्रह्मस्वरूपिणी

मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगत् ।
शून्यं चाशून्यं च ॥

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार है, उनको नमस्कार है, उनको नमस्कार है, उनको बार-बार नमस्कार है।

“ To that Divine Mother who dwells in all beings as Power, to Her I bow , Salutations to Her, to Her I offer my salutations—again and again, endlessly ”

Eternal Forms of Maa Adi-Shakti

The Supreme Energy of the Universe, the Source of All Creation

MahaKali

महाकाली - कालनाशिनी:

मैं महाकाली का सेवन करता हूँ, जिनके दस मुख और दस पैर हैं, जो नीले पत्थर के समान कांति वाली हैं, जो त्रिनयना (तीन आँखों वाली) हैं और समस्त आभूषणों से सुशोभित हैं। वे अपने कर-कमलों में खड्ग (तलवार), चक्र, गदा, बाण, धनुष, परिघ, शूल , भुशुण्डी, नरमुंड और शंख धारण करती हैं। ब्रह्मा जी ने, जब भगवान विष्णु सो रहे थे, तब मधु और कैटभ को मारने के लिए जिनकी स्तुति की थी, उन महाकाली देवी को मैं नमस्कार करता हूँ।

MahaLakshmi

महालक्ष्मी -ऐश्वर्य प्रदायिनी:

मैं कमल पर विराजमान, प्रवाल (मूँगा) के समान कान्ति वाली, महिषासुर का मर्दन करने वाली उन महालक्ष्मी का सेवन करता हूँ, जो अपने कर-कमलों में अक्षमाला (रुद्राक्ष की माला), फरसा, गदा, बाण, वज्र, पद्म (कमल), धनुष, कुण्डिका, दण्ड, शक्ति, तलवार, ढाल, शंख, घण्टा, मधुपात्र, त्रिशूल, पाश और सुदर्शन चक्र धारण करती हैं।

MahaSaraswati

महासरस्वती - ज्ञान दायिनी:

मैं उन महासरस्वती देवी का भजन करता हूँ, जो गौरी (पार्वती) के शरीर से उत्पन्न हुई हैं, जो तीनों जगत् की आधारभूता हैं, जो शुम्भ आदि दैत्यों का मर्दन करने वाली हैं और जिनकी कान्ति शरद ऋतु के चन्द्रमा के समान श्वेत और तेजोमय है। वे अपने कर-कमलों में घण्टा, त्रिशूल, हल, शंख, मूसल, चक्र, धनुष और बाण धारण करती हैं।

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CHANTS
Mantra:
ॐ दुं दुर्गायै नमः
⚜ ⚜ Festival 2026 ⚜ ⚜
Mon 19 Jan

Magha Gupt Navratri

19 Jan (Monday) - 28 Jan (Wednesday)
Thr 19 Mar

Chaitra Navratri

19 March (Thrusday) - 27 March (Friday)
Wed 15 Jul

Ashadha Gupt Navratri

15 July (Wednesday) - 23 July (Thrusday)
Sunday 11 Oct

Sharad Navratri

11 Oct March (Sunday) - 19 Oct (Monday)

ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी । दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते ॥

"हे देवी! आप जयन्ती (सदा विजयशालिनी) हैं, आप मङ्गला (मंगलमयी) हैं, आप काली (काल का नाश करने वाली) हैं, आप भद्रकाली (भक्तों का कल्याण करने वाली) हैं, आप कपालिनी (विकराल स्वरूप) हैं, आप दुर्गा (दुर्गति का नाश करने वाली) हैं, आप क्षमा (क्षमादायिनी) हैं, आप शिवा (कल्याणकारिणी) हैं, आप धात्री (समस्त जगत को धारण करने वाली) हैं, आप स्वाहा (यज्ञ की आहुति स्वीकार करने वाली) हैं, और आप स्वधा (पितरों को तृप्ति देने वाली) हैं। आपको बारम्बार नमस्कार है।"

We offer our salutations to Thee, O Goddess:

जयन्ती (Jayantī) : The Victorious
मङ्गला (Maṅgalā) : The Auspicious
काली (Kālī) : The Power of Time
भद्रकाली (Bhadrakālī) : The Benevolent Destroyer
कपालिनी (Kapālinī) : The Wielder of the Skull
दुर्गा (Durgā) : The Deliverer from Distress
क्षमा (Kṣamā) : The Forgiving
शिवा (Śivā) : The Blissful
धात्री (Dhātrī): The Supporter of Cosmos
स्वाहा(Svāhā) & स्वधा (Svadhā): The Receiver of Offerings
⚜ Devotional Bhajans ⚜

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प्रार्थना अर्पण

मैं तुम्हारे हृदय कमल में वास करती हूँ। अपनी आँखें बंद करो, या अपना संकल्प यहाँ लिखो।

स्थान: सर्वत्र (Everywhere)
समय: अनंत (Eternal)